छत्तीसगढ़ में मौजूदा सरकार के आखिरी बजट को नाम दिया गया था भरोसे का बजट। 8 महीने बाद चुनाव है। ऐसे में प्रदेश सरकार से इसमें किसी चौंकाने वाली बड़ी रियायत, बड़ी घोषणा की उम्मीद थी जिससे कि इसे चुनावी बजट कहा जा सके। सीधे तौर पर ऐसा नहीं हुआ, लेकिन अगर बजट के बिंदुओं को गौर से देखें तो यह पूरी तरह वोटर्स को ध्यान में रखकर बनाया हुआ दिखता है। सरकार का स्पष्ट फोकस गांव, महिलाएं और युवा हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को जब अपना पांचवा बजट सदन में पेश किया तो उसकी दो सबसे बड़ी बातें पहले से ही मालूम थी। एक, की सरकार किसी टैक्स में बढ़ोतरी नहीं करेगी, कोई नया टैक्स नहीं लगाएगी और दूसरी, बेरोजगारी भत्ते को विधिवत लागू करने की घोषणा करेगी। कुछ और बड़े निर्णय जिनका इंतजार था उनमें अनियमित, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, पेंशन स्कीम, महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की घोषणा, गरीबों के लिए नयी आवास योजना जैसी बातें थीं, लेकिन इनकी बात नहीं हुई।