पश्चिम बंगाल में अप्रैल 2023 में पंचायत चुनाव संभावित हैं। लेकिन, हिंसा अभी से शुरू हो चुकी है। जमीनी स्तर पर किस पार्टी की कितनी पकड़ है, यह सब रक्तरंजित इतिहास वाले इन्हीं चुनावों से तय होता है। क्योंकि, यहां करीब 59 हजार पंचायत प्रतिनिधियों के पदों के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़े जाते हैं। 2018 के पंचायत चुनाव में 20 से ज्यादा हत्याएं चुनावी रंजिश में हुई थीं, हालांकि दावे 30 से ज्यादा मौतों के हैं। लेकिन, इस बार के चुनाव में खून-खराबे का डर ज्यादा ही गहरा है। इसकी वजहें भी हैं।
दरअसल, अब हर पंचायत को साल में 4-5 करोड़ रुपए का फंड मिलने लगा है। भास्कर ने कोलकाता, पूर्वी मेदिनीपुर, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना तक के जिलों का हाल जाना। सियासी लड़ाई की संगठित तैयारी की गूंज कहीं बम धमाकों, तो कहीं नए समीकरणों के रूप में अभी से साफ दिखने लगी है। ग्रामीण बंगाल के कई इलाकों में ‘वन टू वन’ मुकाबले के लिए भाजपा को माकपा या कांग्रेस समर्थकों का साथ मिलना नए समीकरण के रूप में सामने आया है। इससे हिंसा का अंदेशा और बढ़ गया है। इसे देखते हुए पंचायत चुनाव में केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग हो रही है।