नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति (bi-monthly policy) के फैसलों की घोषणा की। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट (repo rate) में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे चार फीसदी पर बरकरार रखा है। इसके साथ ही आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट (reverse repo rate) को भी 3.35 फीसदी पर बरकरार रखा है। केंद्रीय बैंक की बजट के बाद यह पहली और इस वित्त वर्ष की आखिरी द्विमासिक मौद्रिक नीति है।
एमपीसी बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए आरबीआई के गर्वनर शक्तिकांत दास (Shaktikant Das) ने कहा कि हमने इकनॉमिक एक्टिविटी में व्यवधान को कम करने के लिए उपाय किए हैं। सीपीआई महंगाई ज्यादा रही लेकिन यह उम्मीद के मुताबिक रही। कोर महंगाई भी ज्यादा है और हेडलाइन महंगाई के वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में चरम पर पहुंचने की आशंका है। वित्त वर्ष 2023 में महंगाई का टारगेट घटाकर 4.5 फीसदी रखा गया है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई के 4.9%, दूसरी तिमाही में 5%, तीसरी तिमाही में 4% और चौथी तिमाही में 4.2% रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2022-23 में रियल जीडीपी की ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है।
मई 2020 में हुआ था बदलाव
माना जा रहा था कि महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) नीतिगत दरों (policy rates) को यथावत रख सकती है।केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक मंगलवार को शुरू हुई थी और आज आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) आज इसमें लिए गए फैसलों की जानकारी दी। यह बैठक सात से नौ फरवरी तक होनी थी। लेकिन महान गायिका लता मंगेशकर के निधन के कारण महाराष्ट्र सरकार ने सात फरवरी को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की थी। इसके बाद आरबीआई ने बैठक एक दिन आगे खिसका दी।