कोरोना वायरस की चपेट में आने से आपके शरीर के कई अंग प्रभावित होते हैं, खास तौर पर आपका दिल। अमेरिका में हुई एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि संक्रमण से रिकवरी के बाद भी मरीजों को हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर का खतरा होता है। ये रिस्क उन लोगों को भी होता है जिन्हें बीमारी के कोई लक्षण नहीं होते।
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कोरोना के शिकार हुए 1 लाख 53 हजार 760 लोगों के स्वास्थ्य को एक साल से ज्यादा समय के लिए ट्रैक किया। इस डेटा की तुलना 56 लाख से भी ज्यादा लोगों से की गई। इन लोगों को कभी कोरोना संक्रमण नहीं हुआ था।
वैज्ञानिकों ने पाया कि वो मरीज जो कोरोना संक्रमण होने के 30 दिन के अंदर ठीक हो गए, उन्हें हार्ट स्ट्रोक का खतरा 1.5 गुना है। साथ ही उनमें हार्ट अटैक का खतरा 1.6 गुना और हार्ट फेलियर का खतरा 1.7 गुना बढ़ गया है। इसके अलावा ऐसे मरीजों को दिल की धड़कनें अनियमित होने का खतरा 1.6 गुना और हार्ट में सूजन का खतरा दोगुना होता है।
कोरोना से जूझने वालों में डीप वेन थ्रोंबोसिस का जोखिम भी दोगुना होता है। ये एक ऐसी जानलेवा कंडीशन है जिसमें शरीर की नसों में खून के थक्के जम जाते हैं। इससे दिल की नसें भी ब्लॉक हो सकती हैं।
जहां कई शोधों में ये पता चला है कि कोरोना के दौरान लोगों को हृदय रोग का खतरा होता है, यह पहली ऐसी रिसर्च है जो कोरोना मरीजों में रिकवरी के बाद इन बीमारियों के खतरे को दिखाती है।
रिसर्च में हार्ट संबंधी बीमारियों का जोखिम सभी उम्र और लिंग के लोगों में समान पाया गया। यहां तक कि मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रोल और किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों में भी कोरोना रिकवरी के बाद दिल की बीमारियों का खतरा समान पाया गया।