4.70 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की ED की कस्टडी आज समाप्त हो रही है। कुछ ही देर में उन्हें विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया जाएगा। पेशी से पहले देशमुख को मेडिकल के लिए ले जाया गया। मनी लॉन्ड्रिंग का यह केस मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा लगाए 100 करोड़ की वसूली मामले से ही जुड़ा हुआ है। देशमुख के खिलाफ मुंबई पुलिस के बर्खास्त API सचिन वझे ने भी वसूली का आरोप लगाया है। मुंबई की तलोजा जेल में बंद वझे फिलहाल मुंबई पुलिस की कस्टडी में है और उसकी हिरासत भी आज खत्म हो रही है।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने 2 नवंबर को देशमुख को 6 नवंबर तक ED की हिरासत में भेजा था। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में देशमुख को 12 घंटे से अधिक चली पूछताछ के बाद 1 नवंबर की देर रात गिरफ्तार कर लिया iगया था। उनके बेटे ऋषिकेश देशमुख को 5 नवंबर को पूछताछ के लिए समन किया गया था, लेकिन लगातार तीसरी बार वे ED के सामने पेश नहीं हुए। इसी को आधार बनाकर ED अनिल देशमुख की कस्टडी बढ़ाने की मांग कर सकती है।
देशमुख की 27 कंपनियों के बारे में ED को पता चला
जांच के दौरान ED को ऐसी 13 कंपनियों के बारे में पता चला है जो अनिल देशमुख, उनके बेटों सलिल और ऋषिकेश के सीधे कंट्रोल में थीं। साथ ही 14 ऐसी कंपनियां हैं, जो अनिल देशमुख के करीबियों के कंट्रोल में चल रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, इनमें कुछ शेल कंपनियां भी हैं।
ED की जांच में यह बात सामने आई है कि इन कंपनियों के बीच लगातार ट्रांजैक्शंस हुए हैं। ED ने कोर्ट में दावा किया है कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल कथित तौर पर अनिल देशमुख के गलत तरीके से कमाए गए धन के इस्तेमाल के लिए किया गया था। जब इनसे जुड़े बैंक खातों की जांच की गई, तो पता चला कि देशमुख के परिवार के मेंबर्स के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित कंपनियों से बड़े पैमाने पर पैसे का फ्लो हुआ है।