बिहार में आम तौर पर उप-मुख्यमंत्री की परंपरा नहीं थी। गठबंधन धर्म निभाने में यह परंपरा बनती चली गई। इस पद का सबसे लंबा अनुभव सुशील कुमार मोदी का रहा है। वे 2015 में बनी सरकार में डिप्टी CM नहीं थे, लेकिन उससे पहले जरूर थे। और फिर पिछली सरकार में बीच में बन गए, जब नीतीश राजद से अलग होकर भाजपा के साथ हो गए थे।
पिछले जनादेश में यह पद तेजस्वी यादव के पास था और इस बार भाजपा के दो नए चेहरे इस पद पर आए हैं। तेजस्वी 8वीं पास थे और नए बने दो डिप्टी CM इंटर पास हैं। यानी, दोनों जनादेश में इस पद पर आए नेताओं की शिक्षा में चार जमात का अंतर है।