रोजगार के लिए खतरा नहीं है एआई, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में बढ़ रहीं हैं नौकरियां

रोजगार के लिए खतरा नहीं है एआई, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में बढ़ रहीं हैं नौकरियां

वाशिंगटन । लोग मानकर चल रहे हैं कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की वजह से नौकरियों पर खतरा मंडराने लगेगा। लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे, लेकिन सच्चाई इससे हटकर है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि एआई अब नौकरियों के लिए खतरा नहीं रह गया है, बल्कि यह जरूरत बन गया है। वैश्विक ऑनलाइन भर्ती मंच ‘इनडीड’ ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया कि देश में कृत्रिम मेधा (एआई) कौशल से जुड़ी नौकरियों की लगातार मांग बढ़ रही है। सितंबर महीने में एआई-संबंधित नौकरियों में 11.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 8.2 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई से जुड़ी नौकरियां मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी क्षेत्र में केंद्रित हैं लेकिन अब इनका विस्तार धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में भी हो रहा है। डेटा और एनालिटिक्स क्षेत्र में लगभग 39 प्रतिशत, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में 23 प्रतिशत, बीमा क्षेत्र में 18 प्रतिशत और वैज्ञानिक अनुसंधान में 17 प्रतिशत नौकरियों के आवेदनों में एआई का उल्लेख है। एआई कौशल की मांग इंजीनियरिंग के सभी क्षेत्रों में देखी जा रही है। इनमें औद्योगिक इंजीनियरिंग (17 प्रतिशत), मैकेनिकल इंजीनियरिंग (11 प्रतिशत) और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (9.2 प्रतिशत) का स्थान प्रमुख है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तीन महीने पहले एआई कौशल वाली नौकरियों में 10.6 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी। इनडीड के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के वरिष्ठ अर्थशास्त्री कैलम पिकरिंग ने कहा कि भारत अन्य बाजारों की तुलना में ऐसी नौकरियों के मामले में कहीं आगे है। भारत को छोड़कर केवल सिंगापुर में ही एआई से जुड़ी नौकरियों की मांग का प्रतिशत इतना अधिक है। यह साफ दिखाता है कि भारत में कई नियोक्ता एआई पर पूरी तरह ध्यान दे रहे हैं। यह रिपोर्ट इनडीड के मंच पर पोस्ट की गई भर्तियों के ब्योरे पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में भर्ती के कुल विज्ञापनों में 0.8 प्रतिशत गिरावट आई, जो भर्तियां कम होने का लगातार छठा महीना है। हालांकि, रिपोर्ट कहती है कि देश में संगठित क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और पर्याप्त नौकरियां भी उपलब्ध हैं। इनडीड ने कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव के कारण नियोक्ताओं को विशेषज्ञ और उच्च-कुशल कर्मचारियों की तलाश है, जो डेटा एनालिटिक्स और स्वचालन जैसे एआई कौशल में दक्ष हों। मौजूदा समय में ऐसे कुशल कर्मचारियों की संख्या कम है। कंपनियों का मानना है कि एआई के इस्तेमाल से उनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इसका उपयोग गणना से लेकर शोध और विश्लेषण में भी बखूबी किया जाता है, जिसकी मदद से भविष्य का आकलन करना और गुणवत्ता को बढ़ाना आसान होगा। यही वजह है कि कंपनियों का खास जोर उन लोगों पर होता है, जो एआई के इस्तेमाल को लेकर सजग रहते हैं और इसमें दक्ष होते हैं।

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