वेस्ट बैंक। इजरायली सेना वेस्ट बैंक में बुलडोजर लेकर जैतून के पेड़ उखाड़ रही है। वेस्ट बैंक के अल-मुगय्यिर गांव में इजरायली सेना की मौजूदगी में बुलडोजरों ने सैकड़ों जैतून के पेड़ नष्ट कर दिए। संयुक्त राष्ट्र ने भी पुष्टि की है कि क्षेत्र में अकाल जैसी स्थिति है, जहां लोग और बच्चे भूख से जूझ रहे हैं।
बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद गाजा में युद्ध शुरू होने से वेस्ट बैंक में हिंसा बढ़ी है। एएफपी के आंकड़ों के मुताबिक, तब से 971 फिलिस्तीनी (आतंकवादी और नागरिक) इजरायली सैनिकों या बस्ती वासियों द्वारा मारे गए, जबकि 36 इजरायली मारे गए। 1967 से इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में 30 लाख फिलिस्तीनी और 5 लाख इजरायली रहते हैं, जिनकी बस्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून में अवैध मानी जाती हैं। उखाड़े गए ज्यादातर पेड़ जैतून के थे, जो वेस्ट बैंक की अर्थव्यवस्था और संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। ये पेड़ लंबे समय से फिलिस्तीनी किसानों और इजरायली बस्तियों के बीच तनाव का कारण रहे हैं। रामल्लाह के पास इस गांव के किसान अब्देलतीफ मोहम्मद अबू आलिया ने बताया कि 70 साल पुराने, एक हेक्टेयर में फैले जैतून के पेड़ों को झूठे बहानों के तहत उखाड़कर जमीन समतल कर दी गई। स्थानीय लोग उखड़े पेड़ों को फिर से लगाने की कोशिश कर रहे हैं। फोटोग्राफरों ने गिरे हुए जैतून के पेड़ और पहाड़ियों पर चलते बुलडोजर देखे, जिनमें से एक पर इजरायली झंडा था और पास में सेना की गाड़ियां खड़ी थीं। जैतून के पेड़ फिलिस्तीन के इतिहास, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़े हैं। ये लचीलेपन, पैतृक भूमि से लगाव और कब्जे के खिलाफ प्रतिरोध के प्रतीक हैं। जैतून की खेती हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। सालाना फसल का समय उत्सव के साथ-साथ इजरायली प्रतिबंधों और हमलों के खिलाफ संघर्ष का भी दौर होता है।