भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को याद रखा जाएगा। उन्होंने इस समझौते के लिए उन्होंने अपनी सरकार दांव पर लगा दी थी, लेकिन अपने फैसले पर अटल रहे। 2008 में अमेरिका के साथ हुआ भारत का ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौते से मनमोहन की दृढ़ता को पूरी दुनिया ने देखा था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन इस ऐतिहासिक समझौते के भविष्य के परिणामों के बारे में इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपनी सरकार का अस्तित्व दांव पर लगा दिया, लेकिन अपने फैसले से डिगे नहीं। अविश्वास प्रस्ताव में वह अपनी सरकार बचाने में भी सफल रहे थे।
परमाणु ऊर्जा में सहयोग पर अड़ गए थे मनमोहन सिंह
असैन्य परमाणु समझौते ने अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते को रणनीतिक साझेदारी में बदलने का मार्ग प्रशस्त किया। जुलाई 2005 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश के साथ मनमोहन की बातचीत के बाद भारत और अमेरिका ने घोषणा की कि वे नागरिक परमाणु ऊर्जा में सहयोग करेंगे।