ईद उल-अज़हा का जश्न अभी परवान पर पहुंचा भी नहीं था कि कंचनजंगा एक्सप्रेस ट्रेन को मालगाड़ी ने टक्कर मारी और चारों ओर चींखने, पुकारने और बचाओ की आवाजें आने लगी। ऐसी भयावह हालत में पीड़ितों की मदद के लिए सबसे पहले दौड़ने वालों में से निर्मल जोत गांव के ही निवासी थे।ईद उल-अज़हा की नमाज अदा कर ली गई थी और उसके कुछ ही देर बाद सियालदह जाने वाली कंचनजंगा एक्सप्रेस के टक्कर की खबर सामने आ गई तो जश्न मनाना छोड़कर मानवता की पुकार पर 32 वर्षीय मोहम्मद मोमिरुल यात्रियों की जान बचाने निकल पड़े। 17 जून को हुए ट्रेन दुघर्टना में 9 लोगों की मौत हो गई और करीब 40 लोग घायल हो गए।