वर्ल्ड डिप्लोमैसी के लिहाज से शुक्रवार का दिन अहम रहा। ईरान और सऊदी अरब के बीच अहम समझौता हुआ। 2016 के बाद दोनों देश एक-दूसरे के मुल्क में अपनी-अपनी एम्बेसी फिर खोलने के लिए राजी हो गए हैं।
अमेरिकी टीवी चैनल CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और सऊदी अरब के बीच यह बातचीत कई महीने से चीन की राजधानी बीजिंग के एक होटल में चल रही थी। हालांकि, चीन और सऊदी अरब ने अब तक इस बारे में ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी नहीं किया है।
- ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक- मुल्क की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली शमकहानी की चीन में अपने काउंटरपार्ट मोसेद बिन मोहम्मद अल एबान से मुलाकात हुई। इस दौरान एग्रीमेंट पर सिग्नेचर किए गए।
- इस मामले में हैरान करने वाली बात ये है कि ईरान की तरफ से बयान जारी किए जाने के कई घंटे बाद भी सऊदी अरब, चीन और अमेरिका ने खामोश रहे। इसके कई मायने हैं। दरअसल, सऊदी सरकार को डर है कि चीन की वजह से हुए इस समझौते से अमेरिका नाराज हो सकता है, क्योंकि उसे इस मामले में उस सऊदी सरकार ने अंधेरे में रखा, जिसके 90% हथियार और तमाम टेक्नोलॉजी अमेरिका की ही है।