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बूढ़ा पारा के जिस डे-भवन में स्वामी जी का बचपन गुजरा वहां बनेगा मेमोरियल

बूढ़ा पारा के जिस डे-भवन में स्वामी जी का बचपन गुजरा वहां बनेगा मेमोरियल

कल युवा दिवस 

स्वामी विवेकानंद की जयंती का दिन है। छत्तीसगढ़ सरकार कल से ही रायपुर में स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रीय स्मारक का काम शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गांधी मैदान में आयोजित एक समारोह में ऐतिहासिक “डे-भवन’ के जीर्णोद्धार कार्यों का शुभारंभ करने वाले हैं। इसी इमारत में कभी स्वामी विवेकानंद का बचपन बीता था।

अधिकारियों ने बताया, राज्य सरकार ने 2020 में डे-भवन में स्वामी विवेकानंद का विश्व स्तरीय स्मारक बनाने का फैसला किया था। अब उसके जीर्णोद्धार कार्यों का शुभारंभ होने जा रहा है। इसके लिए आयोजित समारोह की अध्यक्षता रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, बेलूर पश्चिम बंगाल के कुलपति स्वामी सर्वोत्तमानंद जी महाराज करेंगे। खाद्य और संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, रायपुर सांसद सुनील सोनी, भूतनाथ डे चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. एच.एस. उपाध्याय, विधायक सत्यनारायण शर्मा, बृजमोहन अग्रवाल, कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, रायपुर नगर निगम के महापौर एजाज ढेबर और सभापति प्रमोद दुबे इसके विशिष्ट अतिथि होंगे। इस इमारत में अभी तक हरिनाथ एकेडमी नाम से एक स्कूल का संचालन होता आ रहा था। बुधवार को इसका संचालन करने वाले भूतनाथ डे चेरिटेबल ट्रस्ट ने स्कूल का सामान शिफ्ट कर दिया। इसको पूरी तरह खाली कर सरकार को सौंपा जा रहा है। ट्रस्ट ने अपना कामकाज पड़ोस में ही एक दूसरी इमारत से शुरू किया है। स्कूल से हटाया गया सामान वहां रखा गया है।स्वामी विवेकानंद के पिता विश्वनाथ दत्त रायपुर में काम करते थे। उनके यहां रहने के दौरान 1877 में 14 साल के नरेंद्र नाथ दत्त जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए रायपुर आये थे। उनके साथ उनकी मां भुवनेश्वरी देवी, उनके छोटे भाई महेंद्र नाथ दत्त और बहन जोगेंद्र बाला भी थीं। विश्वनाथ दत्त का परिवार इसी डे-भवन नाम की इमारत में 1879 तक रहा। इस दौरान उन्होंने पिता से खाना बनाना सीखा। संगीत शिक्षा, सतरंज और तैराकी भी यहीं से शुरू हुई। नरेंद्र यहां के बूढ़ातालाब में नहाने जाते रहे। अब इस तालाब को विवेकानंद सरोवर कहा जाने लगा है। बाद में यह परिवार कोलकाता चला गया।

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