चुनाव आयोग ने बारिश के मौसम में भी झारखंड का सियासी पारा बढ़ा दिया है। आयोग ने लाभ के पद के मामले में CM हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश राज्यपाल से की है। माना जा रहा है कि राज्यपाल इस मामले में आज फैसला ले सकते हैं। ऐसे में हेमंत सोरेन की कुर्सी जाने के साथ ही उन पर अयोग्यता की तलवार भी लटक रही है।
सिनेरियो 1 : हेमंत सोरेन का आगे क्या होगा, क्या ये चुनाव आयोग का फैसला आने पर तय होगा?
इस मामले में पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव एक्ट की धारा 8 और 9 के तहत चुनाव आयोग 2 तरह की कार्रवाई कर सकता है-
1. खदान लीज पर लेने के आधार पर हेमंत सोरेन को विधायक पद के लिए अयोग्य घोषित करने की सिफारिश कर सकता है।
2. मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए खुद के नाम पर खदान लीज पर लेने को चुनाव आयोग भ्रष्टाचार मान सकता है।
अगर चुनाव आयोग खदान लीज पर लेने को सरकारी लाभ मानते हुए विधायक के रूप में अयोग्य मानता है तो सोरेन को विधायक पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। इस दौरान विधायक दल हेमंत को दोबारा नेता चुन लेगा और ये 6 महीने तक सीएम बने रह सकते हैं। यानी 6 महीने के अंदर चुनाव लड़कर विधायक बनना होगा।