इजरायल में 1 नवंबर को होने वाले आम चुनाव के लिए सियासी रस्साकशी उफान पर है। ताजा सर्वे बताते हैं कि यदि आज चुनाव हों तो पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 120 सीट वाले सदन में सबसे ज्यादा 57 सीट मिल सकती है।
दूसरी तरफ, लिकुड पार्टी के टॉप 30 पदों के लिए सैकड़ों दावेदार अपने-अपने पोस्टर बैनर के साथ मैदान में हैं। इनमें कुछ पद ऐसे भी हैं, जो पार्टी के सर्वमान्य नेता बेंजामिन नेतन्याहू की पसंद से भरे जाएंगे। इसके लिए दो प्रमुख दावेदार पहले से तय माने जा रहे हैं- अमिचाई चिकली और इदित सिल्मन। दोनों पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की यामीना पार्टी में थे। इनके बागी होने से गठबंधन सरकार गिर गई और चुनाव की नौबत आ गई।
नेतन्याहू ने खुद को शक्तिशाली नेता के तौर पर स्थापित किया
लिकुड प्राइमरी के लिए नेतन्याहू को लड़ने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं। बीते कुछ सालों में नेतन्याहू ने लिकुड पार्टी पर अपना नियंत्रण मजबूत किया है। उन्होंने अपने मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को आंतरिक चुनावों में हराकर या उन्हें राजनयिक नियुक्तियों पर भेजकर या पार्टी से बाहर कर खुद को शक्तिशाली नेता के तौर पर स्थापित किया है।
इसका जवाब है- शायद नहीं। इसकी दो वजह हैं-
- अमेरिका सिर्फ चीन को ताइवान पर हमला करने से रोकना चाहता है। अमेरिका इतना चाहता है कि ताइवान के पास सैन्य और अन्य संसाधन इतने रहें कि चीन आक्रमण करने से कतराए।
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन के पास ज्यादा सैन्य ताकत है। चीन की आर्मी मिलिट्री व्हीकल के मामले में अमेरिका से आगे है। उसके पास ज्यादा टैंक, सैनिक और मिसाइलें भी पर्याप्त हैं। चीन की थल सेना में ही 3 कमांड हैं-