उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के बुलडोजर एक्शन के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई है। जमीयत की मांग है कि बुलडोजर की कार्रवाई को रोका जाए। इसके अलावा अवैध रूप से घरों में तोड़फोड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच जमीयत की याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं।
दरअसल, प्रयागराज में पुलिस ने 10 जून को हुई हिंसा का मास्टरमाइंड जावेद मोहम्मद उर्फ जावेद पंप नाम के शख्स को बताया था। इसके बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण यानी पीडीए के अफसरों ने जावेद के मकान को अवैध बताते हुए ढहा दिया था। जमीयत का आरोप है कि अफसरों ने बिना कानूनी प्रक्रिया के मनमाने ढंग से जावेद का घर ढहाया है।
जावेद का नहीं मकान, उसकी पत्नी को मिला था गिफ्ट
याचिका में लिखा गया है कि जिस मकान को पीडीए ने ढहाया है उसका मालिक जावेद नहीं, बल्कि उसकी पत्नी परवीन फातिमा है। यह घर परवीन को शादी से पहले उनके माता-पिता ने गिफ्ट किया था। चूंकि जावेद का उस मकान पर कोई स्वामित्व नहीं है, इसलिए उस मकान को गिराए जाना कानून के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।