मैं भी गोवा का रहने वाला हूं। पेशे से पत्रकार हूं। लंबे समय से कतर की राजधानी दोहा में रह रहा हूं। कतर एक छोटा देश है, जिसकी आबादी 28 लाख के आसपास है। तीन लाख की आबादी ही स्थानीय लोगों की है। उससे अधिक भारतीय यहां रहते हैं।
लगभग सात से आठ लाख भारतीय कतर में रहते हैं। इनमें बिजनेसमैन, नौकरी करने वालों से लेकर श्रमिक तक शामिल हैं, जिनकी जड़ें आज भी भारत में किसी न किसी रूप में जुड़ी हैं।
एक तरह से कतर में सबसे अधिक आबादी भारतीय मूल के लोगों की है, लेकिन जैसे ही भारत में कोई छोटा या बड़ा नेता हेट स्पीच देता है, किसी धर्म या समुदाय विशेष के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करता है, उसका सीधा असर कतर जैसे छोटे देश में रह रहे भारतीयों पर पड़ता है।
यहां काम करने वाला हर भारतीय खुद को दबाव में महसूस करने लगता है। वह चाहे हिंदू हो या सिख, मुस्लिम या ईसाई। विदेश में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए केवल एक धर्म होता है, वह भारतीय। वह खुद को भारत से जोड़ कर देखता है, लेकिन हेट स्पीच और आपत्तिजनक टिप्पणी से वह चाह कर भी खुद को अलग नहीं कर पाता। न चाहते हुए भी ऐसे हेट स्पीच के कारण उसे शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है।