अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के बाद महिलाओं की जीवन 20 साल पहले जैसा हो गया है। यहां महिलाओं को दबाया जा रहा है। उनके अधिकार छीने जा रहे हैं। महिलाओं की ये स्थिति दुनिया से छिपी नहीं हैं। इसको लेकर UNSC ने चिंता जाहिर करते हुए तालिबान सरकार को सलाह दी थी, जिसे शुक्रवार को तालिबान ने नकार दिया है।
तालिबान सरकार में महिलाओं की हालत दुनिया से छिपी नहीं है। 15 अगस्त 2021 को सत्ता में वापसी के बाद तालिबानियों ने महिला अधिकारों बरकरार रखने का वादा किया था, लेकिन उनके फरमानों से तालिबानियों की कथनी और करनी में फर्क साफ नजर आता है।
दरअसल, सिक्योरिटी काउंसिल ने तालिबान की महिला अधिकार विरोधी नीतियों पर चिंता जताई थी। उन्होंने तालिबान को अपने देश में महिलाओं के मानवीय अधिकारों का हनन न करने की सलाह दी थी।
हिजाब समाज के लिए जरूरी
तालिबान ने UN की इस सलाह को सिरे से नकार दिया है। तालिबानी प्रवक्ता अब्दुल कहर बर्ल्ख ने इस सलाह को नकारते हुए कहा- अफगानिस्तान मुस्लिम आबादी का देश है। इसलिए हमारी सरकार महिलाओं के पर्दे और हिजाब को समाज और संस्कृति के लिए जरूरी मानती है।