असम में विवादित नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एनआरसी अथॉरिटी ने राज्य में पूर्व कॉर्डिनेटर प्रतीक हजेला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मौजूदा एनआरसी कोऑर्डिनेटर हितेश देव सरमा ने हजेला समेत अन्य पर आपराधिक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया है।
असम में एनआरसी की फाइनल लिस्ट 31 अगस्त 2019 को जारी हुई थी जिसमें करीब 19 लाख लोगों को जगह नहीं मिली थी। इसे लेकर कई सवाल उठे, विवाद गहराया और आखिरकार एनआरसी लागू होने की प्रक्रिया धरी की धरी रह गई। पिछले तीन साल से लिस्ट से बाहर रह गए लोग कानूनी दांव पेंच से गुजर रहे हैं और उनका भविष्य अभी भी अधर में है। जानिए भारत सरकार का इतना बड़ा प्रोजेक्ट कैसे अधिकारियों के हाथों हुआ मठियामेठ-
प्रतीक हजेला पर क्या हैं आरोप?
एनआरसी अथॉरिटी ने गुणवत्ता में जांच की कमी के प्रभाव का आंकलन करने के लिए राज्य में तीन जगहों पर सैंपल सर्वे कराया जिसमें एनआरसी लिस्ट में बड़ी संख्या में गलत प्रविष्टियां पाई गईं। हितेश देव सरमा ने आरोप लगाया कि सॉफ्टवेयर को जानबूझकर गुणवत्ता जांच से बचने के लिए डिजाइन किया गया था। उन्होंने इसके पीछे पूर्व कोऑर्डिनेटर हजेला पर आरोप लगाया ताकि कुछ अधिकारियों को NRC लिस्ट में संदिग्ध नागरिों को शामिल करने की छूट मिल सके। हितेश देव सरमा ने एफआईआर में कहा, ‘इसे राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले राष्ट्रविरोधी कृत्य के रूप में देखा जा सकता है।’
हजेला के खिलाफ यह पहली एफआईआर नहीं है। इससे पहले पिछले साल असम पब्लिक वर्क्स नाम के एनजीओ ने एनआरसी अपडेटिंग प्रक्रिया में फैमिली ट्री वेरिफिकेशन पर कथित छेड़छाड़ के आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई थी। सितंबर 2019 में असम पुलिस ने प्रतीक हजेला के खिलाफ एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट में कथित विसंगतियों को लेकर दो केस दर्ज किए थे।