लंबे अरसे तक पंजाब की राजनीति का केंद्र रही पटियाला अर्बन विधानसभा सीट पर पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार अलग समीकरण बन रहे हैं। कांग्रेस पार्टी छोड़ चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह 80 साल की उम्र में एक बार फिर अपना सियासी वजूद साबित करने के लिए कवायद करते दिख रहे हैं। बदले हालात का अंदाजा इस तथ्य से ही लगाया जा सकता है कि आज तक कैप्टन ने किसी चुनाव में कभी छोटी रैली नहीं की मगर इस बार उन्हें नुक्कड़ सभाओं तक में जाना पड़ रहा है।
कांग्रेस से अलग होने के बाद कैप्टन पहली बार अपनी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’पार्टी के बैनर तले पटियाला अर्बन सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस में रहते हुए पूरे प्रदेश में प्रचार करने वाले कैप्टन का इस बार पूरा फोकस अपने विधानसभा हलके पर दिख रहा है। वह इस बार चुनाव प्रचार के दौरान पंजाब में इक्का-दुक्का जगह ही बड़ी रैलियों में अपनी सहयोगी BJP और अकाली दल (संयुक्त) के मंच पर दिखे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर कैप्टन के लिए हालात इसलिए भी विपरीत हैं, क्योंकि उनका गठबंधन BJP से है जो खेती कानूनों व किसान आंदोलन के कारण पहले से पंजाबियों के निशाने पर है।
कैप्टन के सामने कोई नेता जमा नहीं पाया पैर
पंजाब खासकर प्रदेश कांग्रेस में एक समय महाराजा की तरह एकछत्र राज करने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह का सबसे मजबूत पहलू यही है कि आज तक कोई भी नेता उनके इस विधानसभा हलके में अपना कद बड़ा नहीं कर पाया। कैप्टन 2002, 2007, 2012 व 2017 में पटियाला अर्बन सीट पर बड़े मार्जिन से जीते। यहां से जीतने के बाद उन्होंने दो बार सूबे के मुख्यमंत्री का पद संभाला और लगभग साढ़े 9 साल सरकार चलाई। उनके कार्यकाल में पूरा पंजाब एक तरह से पटियाला से ही कंट्रोल होता रहा।