क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शंस (Cryptocurrency Transactions) को टैक्स के दायरे में लाने का सरकार का फैसला, क्रिप्टो एक्सचेंजेस (Crypto Exchanges) के लिए एक नई मुश्किल खड़ी करने वाला है। एक्सपर्ट का कहना है कि यह मुश्किल इक्वलाइजेशन लेवी के रूप में होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर मामलों में भारतीय नागरिकों द्वारा क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए क्रिप्टो एसेट उन लोगों से खरीदे जाते हैं, जो भारत के बाहर रहते हैं। इक्वलाइजेशन लेवी विदेशी प्लेयर्स पर लागू होती है और तब लागू होती है, जब सर्विसेज नॉन इंडियंस द्वारा बेची जाती हैं।
एक्सपर्ट का कहना है कि कई उदाहरण हैं, जहां इस बात को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है कि क्रिप्टो ट्रांजेक्शन में सेलर भारत में रहने वाला है या नहीं क्योंकि ज्यादातर क्रिप्टो एक्सचेंज देश के बाहर बेस्ड हैं। ऐसा भी है कि कई मामलों में एक्सचेंजेस 2 फीसदी इक्वलाइजेशन लेवी के लिए ईकॉमर्स प्लेयर्स की परिभाषा में कवर होंगे।
कैसे बढ़ेगी मुश्किल
केपीबी एंड एसोसिएट्स में पार्टनर पारस सावला का कहना है कि क्रिप्टो एक्सचेंजेस के जरिए होने वाले ट्रांजेक्शन के मामले में एक्सचेंजेस को टीडीएस कलेक्शन के लिए इंटरमीडियरी बनाया जा सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि जब एक्सचेंज इसका अनुपालन करने की कोशिश करेंगे तो उन्हें पहले टीडीएस काटना होगा और फिर उन्हें अपनी बुक्स में दर्ज करना होगा। आखिर में यह इक्वलाइजेशन लेवी आकर्षित करेगा।