चांदी ने बीते 4 सालों में करीब 63% रिटर्न दिया है। ज्यादातर अन्य एसेट के मुकाबले स्थिर रिटर्न को देखते हुए वैश्विक पैमाने पर चांदी में निवेश तेजी से बढ़ा है। लेकिन भारत में यह ट्रेंड कम रफ्तार से जोर पकड़ रहा है। यह स्वाभाविक है क्योंकि भारतीय निवेशक बाकी दुनिया के मुकाबले बदलाव स्वीकार करने में ज्यादा वक्त लेते ही हैं।
देश में लंबे समय से सोने और चांदी की फिजिकल होल्डिंग की परंपरा रही है। लेकिन बीते 5 सालों के दौरान इस मामले में काफी बदलाव आया है। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में अब ज्यादा लोग निवेश करने लगे हैं। इसी का नतीजा है कि ETF का दायरा बढ़ रहा है, इसी की ताजा कड़ी सिल्वर ETF है। भारत में बीते साल के अंत में बाजार नियामक सेबी ने सिल्वर ETF को मंजूरी दी थी।
इस साल अब तक दो सिल्वर ETF बाजार में आ चुके हैं। आगामी महीनों में न केवल इनकी संख्या बढ़ेगी, बल्कि इनमें निवेश भी बढ़ने की संभावना है। आपको भी इनमें निवेश करना चाहिए। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया आपको इसके बारे में बता रहे हैं।
ETF क्या है?
ETF सिक्युरिटीज और शेयर जैसे एसेट का एक बास्केट है, जिसकी खरीद-बिक्री एक्सचेंज पर होती है। इसीलिए इनके फीचर्स और फायदे शेयरों में निवेश की तरह हैं, लेकिन ये म्यूचुअल फंड्स और बॉन्ड जैसे इंस्ट्रूमेंट्स के भी लाभ देते हैं। किसी एक कंपनी के शेयर की तरह ETF की ट्रेडिंग भी दिनभर होती है और इनके दाम एक्सचेंज पर सप्लाई और डिमांड के हिसाब से घटते-बढ़ते रहते हैं।