कंस्ट्रक्शन प्लान में बदलाव के बाद भी समय पर पूरा होगा प्रोजेक्ट

कंस्ट्रक्शन प्लान में बदलाव के बाद भी समय पर पूरा होगा प्रोजेक्ट

देश के नए संसद भवन को बनाने का खर्च करीब 29% बढ़कर 1,250 करोड़ रुपए हो गया है। पहले इसे 971 करोड़ रुपए में बनाया जाना था। खर्च बढ़ने की वजह एडिशनल वर्क, कंस्ट्रक्शन प्लान में बदलाव और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने संशोधित अनुमानित लागत के लिए लोकसभा सचिवालय से सैद्धांतिक मंजूरी मांगी है। CPWD ने हाल ही में पांच सदस्यीय पैनल को प्रोजेक्ट की कॉस्ट डीटेल्स और वर्क-इन-प्रोग्रेस डीटेल्स प्रस्तुत की। इस पैनल को सरकार ने मेगा सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत सभी काम की निगरानी के लिए गठित किया है।

40% प्रोजेक्ट पूरा, अक्टूबर 2022 की डेडलाइन
नए संसद भवन का काम टाटा को 971 करोड़ रुपए में दिया गया है और 40% प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। सरकार ने इस प्रोजेक्ट के पूरे होने की डेडलाइन अक्टूबर 2022 रखी है। सरकार चाहती है कि नए भवन में शीतकालीन सत्र आयोजित किया जा सके। एडिशनल वर्क और कंस्ट्रक्शन प्लान में बदलाव के बाद भी प्रोजेक्ट के पूरे होने की डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

13 एकड़ में बन रही नई इमारत
प्रस्तावित चार मंजिला इमारत 13 एकड़ में बन रही है। ये राष्ट्रपति भवन से कुछ ही दूरी पर है। पहले इस प्रोजेक्ट के 75वें स्वतंत्रता दिवस से पहले खत्म होने की उम्मीद थी। बाद में समय सीमा अक्टूबर की गई। सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत नया त्रिकोणीय संसद भवन, प्रधानमंत्री आवास, PMO, उप राष्ट्रपति भवन, एक कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बनाने के साथ ही राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक कॉरिडोर को नए सिरे से संवारा जा रहा है।

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