यूक्रेन जंग के मुहाने पर है। रूसी सेनाएं उसकी सीमा से महज 20 किलोमीटर दूर हमले के लिए तैयार नजर आती हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी नाटो देश इस जंग को टालने के लिए भरपूर कोशिश कर रहे हैं। आज जिनेवा में रूस और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की बैठक पर नजरें टिकी हैं। डर इस बात का है कि अगर रूस हमला करता है तो यह जंग रूस बनाम पश्चिम हो सकती है। जंग की आशंका देखते हुए ब्रिटेन ने यूक्रेन को एंटी टैंक वेपन्स दे दिए हैं तो कनाडा ने अपनी पैरा ट्रूपर रेजीमेंट यूक्रेन भेज दी है।
एकजुट नहीं है नाटो
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक- अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मुलाकात से यह पता लगेगा कि यूरोप में एक नई जंग होती है या इसे टाला जा सकेगा। रूस अब पश्चिम के लिए बड़ा खतरा है और ऐसा लगता है कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच सही कोऑर्डिनेशन नहीं है।
खुद बाइडेन ने गुरुवार रात ‘छोटी घुसपैठ’ शब्द इस्तेमाल करके सहयोगी देशों को असमंजस में डाल दिया। हालांकि, बाद में सफाई दी कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो अमेरिका और सहयोगी आर्थिक तौर पर करारा जवाब देंगे।
ज्यादा उम्मीदें नहीं
अमेरिकी अधिकारियों को लावरोव-ब्लिंकन मुलाकात से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। पिछले हफ्ते तीन अमेरिकी डिप्लोमैट्स ने रूस के अफसरों से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्हें लगता है कि विवाद खत्म होने की गुंजाइश काफी कम है। रूस साफ तौर पर कह रहा है कि नाटो को यह वादा करना होगा कि यूक्रेन नाटो का हिस्सा नहीं बनेगा और अमेरिका या उसके सहयोगी इस क्षेत्र में पैर नहीं पसारेंगे। साथ ही यह भी कि अमेरिका यहां से अपने तमाम न्युक्लियर वेपन्स हटा लेगा। खुद रूस के विदेश मंत्री मान चुके हैं कि ब्लिंकन से उनकी बातचीत से ज्यादा उम्मीदें नहीं की जानी चाहिए। ब्लिंकन ने कहा- यह ठीक है, लेकिन बातचीत के रास्ते तो खुले रखने चाहिए।