नए साल पर वे माता का आशीर्वाद लेने के लिए वैष्णो देवी पहुंचे थे। वैष्णो देवी भवन खचाखच भरा हुआ था। भीड़ हजारों में थी। कुछ चश्मदीदों की मानें तो यह 3 लाख तक थी। दुनिया जब नए साल के जश्न में डूबी थी, उसी दौरान आधी रात के बाद जयकारों का उद्घोष मातम की चीख-पुकार में बदल गया। वैष्णो देवी परिसर में आधी रात के बाद कुछ ऐसा हुआ जो श्रद्धालुओं ने इससे पहले कभी नहीं देखा था। भीड़ के भयानक रेले के बीच भगदड़ मची और 13 लोग पिस गए। अधिकतर जवान हैं। एक चश्मदीद ने जो बताया, वह रोंगटे खड़े करता है। रात के खौफ को बयां करते हुए उसने बताया कि कैसे करीब 14 साल की बच्ची ने उनकी आंखों के सामने दम तोड़ दिया।
माता के भवन से श्रद्धालु इस बार बेहद दर्दनाक यादों के साथ लौट रहे हैं। मंदिर में व्यवस्था को लेकर भारी गुस्सा है। कटरा लौट रहे एक चश्मदीद ने इसे बयां किया। उन्होंने बताया, ‘प्रशासनिक व्यवस्था बिल्कुल भी ठीक नहीं थी। श्रद्धालुओं की लाइन को दो भागों में बांटा नहीं गया था। सभी को एक साथ आने-जाने दिया जा रहा था। इससे भगदड़ मच गई। जाने वाले लोग जल्दबाजी में होते हैं। वे कहीं से भी निकलने के चक्कर में थे। इसने स्थिति को बिगाड़ दिया। मैंने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा था।’
‘मैंने 14-15 साल की बेटी को भीड़ में पिसते देखा’
वैष्णो देवी से लौट रहे एक अन्य श्रद्धालु भी ऐसी खौफनाक यादों के साथ लौट रहे थे, जो वह जीवन में कभी भूल नहीं पाएंगे। उन्होंने बताया कि वह 20 साल से माता के दर्शनों के लिए आ रहे हैं, लेकिन जीवन में उन्होंने न तो ऐसी भीड़ देखी और न ही ऐसा खौफनाक मंजर। उन्होंने बताया, ‘मैं 31 दिसंबर के आसपास माता के दर्शनों के लिए करीब 20 साल से आ रहा हूं। ऐसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। इतनी भीड़ मैंने कभी नहीं देखी। उस घटना को देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं। एक 14-15 साल की बेटी की मौत हो गई। यह हुआ सिर्फ इस वजह से कि वहां पुलिसकर्मी कम थे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि उसको कंट्रोल कर पाना बहुत मुश्किल था। सीआरपीएफ के जवानों ने बहुत विनम्रता से सबको हैंडल किया हुआ था, लेकिन स्थिति कैसे बिगड़ती चली गई पता ही नहीं चला। एकदम से काफी सारे लोग पिस गए। हम उस समय दर्शन कर चुके थे। काफी लोग तो बिना दर्शन किए ही लौट गए।’