नई दिल्ली
शादियों का सीजन (Wedding Season) शुरू हो चुका है। शादी चाहे लड़के की हो या लड़की की, हर कोई अपने अरमान पूरे करना चाहता है। इसलिए जितना संभव हो सकता है, उतना ज्यादा पैसा खर्च करता है। लेकिन एक शादी पर आने वाले कुल खर्च में केवल शादी से जुड़े खर्चे ही नहीं बल्कि टैक्स भी शामिल रहता है। यह टैक्स, जीएसटी (Good and Service Tax) की मद में होता है और विभिन्न प्रकार की सर्विसेज (Services) के एवज में रहता है। एक आम शादी पर अगर औसतन 7 लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं, तो इसमें 1 लाख रुपये से ज्यादा का तो जीएसटी (GST) ही शामिल रहता है।
शादी समारोह के प्रमुख खर्चों में कपड़े-फुटवियर, ज्वैलरी, मैरिज हाॅल, टेंट-पंडाल, सजावट-लाइट्स, वीडियोग्राफी, बैंड-बाजा, ब्यूटी पार्लर, कैटरिंग, शादी कार्ड आदि शामिल रहते हैं। इन सब पर जीएसटी रेट की दरों का आकलन करें तो 7 लाख रुपये तक की शादी में 1 लाख रुपये से ज्यादा का तो जीएसटी ही जाएगा। हां यह बात अलग है कि जीएसटी की दर सर्विस प्रोवाइडर्स की ओर से बताए गए रेट में शामिल रहती है।
शादी से जुड़ी कुछ प्रमुख सर्विसेज पर जीएसटी
कपड़े व फुटवियर: 5 से 12 फीसदी
गोल्ड ज्वैलरी: 3 फीसदी
मैरिज गार्डन: 18 फीसदी
टेंट: 18 फीसदी
लाइटिंग: 18 फीसदी
डेकोरेशन: 18 फीसदी
बैंड बाजा: 18 फीसदी
फोटो-वीडियो: 18 फीसदी
शादी कार्ड: 18 फीसदी