लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान कर मास्टरस्ट्रोक चल दिया है। बुंदेलखंड रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। दरसअल कृषि कानूनों के चलते पश्चिम यूपी, हरियाणा और पंजाब के किसान दिल्ली-यूपी और दिल्ली-हरियाणा बॉर्डरों पर पिछले एक साल से आंदोलन कर रहे थे। किसान आंदोलन को यूपी में बीजेपी की सत्ता तक पहुंचने की राह पर बड़ा रोड़ा माना जा रहा था लेकिन बीजेपी ने कानून वापसी का ऐलान कर न सिर्फ रास्ते का पत्थर हटाया है बल्कि जाटलैंड में विपक्ष की राजनीति को भी बड़ा झटका दिया है।
यूपी में पिछले तीन चुनावों 2014 लोकसभा, 2017 विधानसभा और 2019 लोकसभा चुनाव में पश्चिम यूपी से बीजेपी को बड़ी जीत मिली थी। तीनों ही चुनावों में बीजेपी को ध्रुवीकरण का बहुत फायदा मिला था। लेकिन किसान आंदोलन के बाद से स्थितियां काफी कुछ बदल गई थीं। 2022 में होने वाले चुनाव में किसान आंदोलन पश्चिम यूपी में बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है। इसे भुनाते हुए ही विपक्षी दलों आरएलडी, सपा और कांग्रेस ने पिछले दिनों खूब महापंचायतें आयोजित कीं और जाट-मुस्लिम एकता को फिर से स्थापित करने का प्रयास किया जो 2013 मुजफ्फरनगर दंगों के बाद छिन्न-भिन्न हो गई थी।
किसान महापंचायत ने बढ़ाई थी बीजेपी की मुश्किलें
फिर 12 सितंबर को किसान संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में मुजफ्फरनगर में महापंचायत हुई जहां किसानों की उमड़ी भीड़ और सरकार के खिलाफ आक्रोश ने बीजेपी को परेशानी कर दिया था। यह बीजेपी नेताओं के बयानों से साफ झलकने लगा था। बीजेपी को अपने नेताओं से ही चुनौती मिलने लगी थी। चुनाव पूर्व ओपिनियन पोल में भी किसान आंदोलन के चलते पश्चिम यूपी में बीजेपी को नुकसान होता नजर आ रहा था।