भारत की जेनरेशन जेड यानी 1997 से लेकर 2012 के बीच पैदा हुए अधिकांश लोगों के बीच बचत की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। 24 साल तक की उम्र वाली यह पीढ़ी 40 की उम्र तक पहुंचने से पहले ही इतनी बचत कर लेना चाहती है कि बाकी का जीवन तंगहाली में न गुजरे। यही कारण है कि यह युवा पीढ़ी खर्च करने की जगह भविष्य के लिए पैसे जोड़ने में विश्वास करती है।
वायरल फिशन नाम के यूथ कम्युनिटी प्लेटफॉर्म की ओर से कराए गए सर्वे में शामिल 32% जेनरेशन जेड ने खर्च करने के बजाय पैसे बैंक खाते या घर पर ही रखने में दिलचस्पी दिखाई। ब्याज दरों में गिरावट के बावजूद इनमें से 23% को फिक्स्ड डिपॉजिट पसंद है। इन्हें क्रिप्टोकरेंसी पर भरोसा नहीं है। यह संख्या क्रिप्टोकरेंसी में निवेश में रुचि रखने वाले युवाओं से दोगुनी है। वायरल फिशन के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर आदित्य आनंद ने कहा, कोरोना महामारी के बाद युवा पीढ़ी खर्च को लेकर ज्यादा सतर्क और जिम्मेदार हो गई है।
फिटनेस और एंटरटेनमेंट प्राथमिकता में सबसे नीचे
सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 फीसदी जेन जेड बचत के पैसे शेयरों में लगाना चाहती है। खर्च को लेकर इनकी प्राथमिकताओं में सब्सक्रिप्शन, फिटनेस और एंटरटेनमेंट सबसे नीचे हैं। सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने इन चीजों पर कम या बिलकुल खर्च नहीं करने की बात कही है। सर्वे में शामिल लगभग 25% युवाओं ने कहा कि वे घूमने-फिरने में पैसे खर्च करेंगे। 13 फीसदी से भी कम ने कहा कि वे शॉपिंग या मनोरंजन पर खर्च करेंगे।
फाइनेंस को लेकर युवाओं के रुख पर कोविड का असर
यह सर्वे ऐसे समय हुआ है जब भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-महामारी के झटके से तेजी से उबर रही है। उद्योग-धंधे दोबारा शुरू हो गए हैं। शेयर बाजार में उछाल है। लेकिन रोजगार और महंगाई को लेकर आशंकाएं बरकरार हैं। इस बीच जिन युवाओं का करियर शुरू हुआ है, वे बचत और खर्च को लेकर संजीदा हैं। कुल आबादी में बड़ी हिस्सेदारी के नाते देश में खपत, खर्च और आर्थिक वृद्धि में जेनरेशन जेड का बड़ा योगदान है। भारत की ग्रोथ में खपत का योगदान लगभग 60 फीसदी है।