हेलमेट पहनकर याद्दश्त भी बढ़ाई जा सकेगी। इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ही हेलमेट बनाने का दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है, इस हेलमेट के जरिए बुजुर्गों में भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) को कंट्रोल किया जा सकेगा। इस हेलमेटनुमा डिवाइस की कीमत 7.5 लाख रुपए बताई गई है।
इस हेलमेट को तैयार करने वाली इंग्लैंड की डरहम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है, दिनभर में इसे दो बार 6-6 मिनट पहनने पर याद्दाश्त में इजाफा होने के साथ न्यूरॉन्स और ब्रेन स्किल्स में सुधार देखा गया।
शोधकर्ताओं का कहना है, ब्रिटेन में 8.5 लाख लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं। ऐसे मरीजों के लिए यह हेलमेट एक गेम-चेंजर डिवाइस साबित हो सकता है।
कैसे काम करता है हेलमेट, इसे समझें
हेलमेट विकसित करने वाले डॉ. गॉडर डूगल का कहना है, यह डिवाइस ‘फोटो बायोमॉडुलेशन’ की तरह काम करती है। इसके लिए मरीज को यह हेलमेट पहनाया जाता है। इससे निकलने वाली इंफ्रारेड किरणें दिमाग की गहराई तक पहुंचती है।
आसान भाषा में समझें तो यह ब्रेन की मृत हो रही कोशिकाओं को रिपेयर करके उनकी काम करने की क्षमता को पहले से बेहतर बनाने का काम करता है। यह डिवाइस माइटोकॉन्ड्रिया को बूस्ट करके कोशिकाओं को एनर्जी देता है ताकि ये ब्रेन की इम्यून सेल्स को एक्टिवेट कर सकें और डिमेंशिया की वजह बनने वाले जहरीले तत्वों को बाहर निकल सकें।