नई दिल्ली। केंद्र सरकार संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने की दिशा में एक नया संशोधन बिल लाने की तैयारी में है. इस कानून को 2023 में संसद ने पारित किया था, लेकिन इसके लागू होने को जनगणना और परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया से जोड़ दिया गया था. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अब सरकार इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए नए विधायी कदमों पर विचार कर रही है. सरकार का उद्देश्य है कि महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान अगले आम चुनावों (2029) से पहले लागू किया जा सके. लेकिन इस प्रस्ताव के साथ ही कई राजनीतिक और संघीय सवाल भी उठ खड़े हुए हैं. इनमें खासतौर पर सीटों की संख्या बढ़ाने, दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व और विपक्ष का रुख शामिल है।
जनगणना से पहले क्यों लाया जा रहा संशोधन?
अगर मौजूदा कानून की बात करें, तो इसके अनुसार महिलाओं के लिए आरक्षण तभी लागू होगा जब नई जनगणना के बाद परिसीमन किया जाएगा. लेकिन भारत में 2021 की जनगणना अभी तक नहीं हो पाई है, जिससे इस कानून के लागू होने में लंबी देरी हो सकती है. इसी कारण केंद्र सरकार इस आरक्षण को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन से इसे आंशिक रूप से अलग करने के विकल्प तलाश रही है. लेकिन, सवाल ये उठता है कि इस संशोधन के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत है. ऐसे में क्या सरकार को विपक्ष का भरपूर सहयोग है? क्योंकि, बिना विपक्षी दलों के सहयोग के दो-तिहाई बहुमत मुमकिन नहीं है और यह पारित भी नहीं हो पाएगा. ऐसे में सरकार इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है?
5 राज्यों के चुनाव तो कारण नहीं?
इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी कहते हैं कि इतिहास