नई दिल्ली: ईरान संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है. ट्रंप की ओर से साफ कर दिया गया है कि ये वॉर करीब 1 महीने तक चल सकती है. इसका मतलब है कि कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई चेन में काफी बड़ी बाधा आ सकती है. जिसकी वजह से ग्लोबल इकोनॉमी की टेंशन में इजाफा देखने को मिल सकता है. लेकिन भारत को ऐसी टेंशन बिल्कुल भी नहीं है. भारत के पास कच्चे तेल का इतना स्टॉक है कि 45 दिनों तक उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. इसका मतलब है कि कच्चे तेल की बाधित सप्लाई देश की रफ्तार को नहीं रोक सकती है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर कच्चे तेल को लेकर किस तरह के आंकड़े सामने आई है.
ऊर्जा बाजार विश्लेषण फर्म केप्लर के आकलन के अनुसार ईरान संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के पास लगभग 40-45 दिन की जरूरत पूरी करने लायक कच्चे तेल का भंडार मौजूद है. केप्लर के मुताबिक, भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल कमर्शियल कच्चे तेल का स्टॉक है. इसमें रिफाइनरीज के पास मौजूद स्टॉक, भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और देश की ओर आ रहे जहाजों पर लदा तेल शामिल है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 फीसदी कच्चा तेल आयात