बीएनपी के हिंदू सांसद ने भारत के विदेश नीति पर उठाए सवाल……..हसीना के अलावा किसी को नहीं पूछा

बीएनपी के हिंदू सांसद ने भारत के विदेश नीति पर उठाए सवाल……..हसीना के अलावा किसी को नहीं पूछा

ढाका। बांग्लादेश की हालिया चुनाव में बीएनपी गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में बीएनपी ने 212 सीटें जीती हैं और पार्टी के नेता तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे है। इस चुनाव में तीन हिंदू सांसद भी चुने गए हैं, जिसमें ढाका-3 से जीते गोयेश्वर चंद्र रॉय संभावित मंत्री हैं। गोयेश्वर पहले भी बीएनपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और भारत से अच्छे संबंधों के समर्थक हैं, लेकिन उनके अनुसार भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न पर कभी कार्रवाई नहीं की।
बीएनपी सांसद रॉय ने बताया कि चुनाव से पहले बीएनपी ने अपनी योजनाओं को जनता के सामने रखा और युवाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उनका कहना है कि बीएनपी सरकार कानून और व्यवस्था बनाएगी, अर्थव्यवस्था मजबूत करेगी और निर्यात बढ़ाने पर ध्यान देगी। उन्होंने जोर दिया कि बांग्लादेश में हर व्यक्ति को संविधान के अनुसार बराबरी का अधिकार है और सरकार तथा प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हसीना सरकार के दौरान कई हिंदू समुदाय के लोग टॉर्चर किए गए, लेकिन भारत ने इस पर कभी कोई कदम नहीं उठाया।
गोयेश्वर ने स्पष्ट किया कि बीएनपी के समर्थन में सभी धर्मों के लोग शामिल थे…..हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई—और बांग्लादेश में सांप्रदायिक सद्भाव की लंबी परंपरा रही है। उन्होंने अंतरिम सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उसने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए, लेकिन आर्थिक और कानून व्यवस्था की चुनौतियों के कारण पूरी क्षमता से काम नहीं कर सकी। अब चुनी हुई सरकार को संविधान और कानून के अनुसार काम करना चाहिए, न कि पार्टी की प्राथमिकताओं के अनुसार।
गोयेश्वर ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि भारत ने बांग्लादेश में केवल शेख हसीना से दोस्ती की और बीएनपी नेताओं को नजरअंदाज किया। भारत को यह स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने पिछली नीतियों में गलती की। उन्होंने कहा कि हसीना को भारत में पनाह नहीं दी जानी चाहिए और सभी अपराधियों को कोर्ट का सामना करना चाहिए। उनका मानना है कि पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं और यह केवल किसी एक पार्टी या देश के बड़ेपन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि बराबरी और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होना चाहिए।

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