ओस्लो । हम और आप अक्सर एक बादल छाने या एक दिन की बारिश होने से उदास हो जाते हैं, वहीं नॉर्वे के लॉन्गइयरबायेन में करीब 2,500 लोग हर साल लगातार चार महीने यानी नवंबर से फरवरी तक घने अंधेरे में ही अपनी जिंदगी बिताते हैं। विज्ञान की भाषा में इसे पोलर नाइट कहते हैं। जहां सूरज पर्दे के पीछे ही रहता है और दुनिया पूरी तरह कृत्रिम रोशनी पर निर्भर हो जाती है। हमारी डेली रूटीन जहां सूरज की पहली किरण से तय होती है, वहीं यहां के लोगों की घड़ी नंबरों का खेल है। बाकी दुनिया में सूरज का उगना ताजगी लाता है, लेकिन यहां की सुबह और रात में कोई फर्क नहीं होता। यहां के लोग विटामिन-डी की गोलियां और विशेष लाइट थेरेपी वाले लैंप्स का सहारा लेते हैं।