हिन्दी लोकभाषा हमारे माथे की है बिन्दी
साहित्य का एक ही रंग- राग और आनंद
हमने सदैव अधिसत्ता नहीं, प्रभुसत्ता की भावना रखी
नमस्कार अब बन गया है वैश्विक शब्द
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘विश्वरंग–2025 टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव को किया संबोधित