बिज़नेस | देश में GST रेट कम करने के बाद अब सरकार ने फार्मा सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल यानी फार्मास्यूटिकल इनपुट के लिए मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (MIP) तय करने का फैसला लिया है. इसके कारण देश में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं. फार्मा इंडस्ट्री के कई विशेषज्ञों ने सरकार के इस फैसले पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि कुछ जरूरी कच्चे माल पर MIP लगाने से API (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट) और दवा बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी. जब लागत बढ़ेगी, तो इसका असर सीधे मरीजों तक पहुंचेगा और दवाएं महंगी होंगी|
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव का मकसद चीन जैसे देशों से होने वाले बड़े पैमाने पर कच्चे माल के आयात को कम करना है, क्योंकि इससे भारत के घरेलू उत्पादकों की टिकाऊ क्षमता पर असर पड़ सकता हैदवाओं की कीमत में बड़ा उछाल संभव! MSME सेक्टर को लग सकता है तगड़ा झटका