तेल आयात नीति में बड़ा बदलाव, भारत ने रूस की जगह अमेरिका और वेस्ट एशिया की ओर बढ़ाया कदम

तेल आयात नीति में बड़ा बदलाव, भारत ने रूस की जगह अमेरिका और वेस्ट एशिया की ओर बढ़ाया कदम

व्यापार: अमेरिका की ओर से रूस के दो बड़े तेल उत्पादकों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत अब रूस के बदले पश्चिम एशिया, अमेरिका, लैटिन अमेरिका, कनाडा, ब्राजील आदि से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा सकता है। हालांकि यहां से ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी जिससे आयात बिल में वृद्धि होगी। अभी भारत रोज रूस से 17 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात करता है और केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने की तिथि 21 नवंबर तक यही स्थिति बनी रह सकती है। मगर इसके बाद इसमें कमी आने लगेगी।

भारत के सरकारी और निजी रिफाइनरियां अभी रोसनेफ्ट और लुकोइल से करीब 12 लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीदती हैं। इनमें से अधिकांश मात्रा निजी रिफाइनरियों, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और नायरा एनर्जी की है।

प्रतिबंध लागू होने के बाद यह खरीद बंद करनी होगी क्योंकि रूस की इन कंपनियों के साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष खरीद करने वाली कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंध के दायरे में आ जाएंगी। केप्लर के प्रमुख शोध विश्लेषक (रिफाइनिंग एवं मॉडलिंग) सुमित रिटोलिया ने कहा कि 21 नवंबर तक रूसी कच्चे तेल का प्रवाह 16 से 18 लाख बैरल प्रतिदिन बना रह सकता है। लेकिन इसके बाद रोसनेफ्ट और लुकोइल से आने वाले तेल की मात्रा में प्रत्यक्ष गिरावट दिखेगी, क्योंकि भारतीय रिफाइनर अमेरिकी प्रतिबंधों के किसी भी जोखिम से बचना चाहेंगे। एजेंसी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *