सिडनी। ऑस्ट्रेलिया की एक नई रिसर्च ने पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी दवाओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया की इस स्टडी में पाया गया कि पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी आम दवाएं एंटीबायोटिक दवाओं के असर को कम कर सकती हैं। ये दोनों ही टेबलेट बैक्टीरिया को ज्यादा मजबूत बना सकती हैं। इसका सीधा मतलब है कि ये दवाएं एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती हैं, जो इस वक्त पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, जब इन दवाओं का सेवन एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाता है, तो बैक्टीरिया में म्यूटेशन होने लगता है। यह बदलाव उन्हें न केवल सिप्रोफ्लोक्सासिन बल्कि कई अन्य एंटीबायोटिक्स के खिलाफ भी ज्यादा रजिस्टेंट बना देता है। इसके कारण इलाज असरदार नहीं हो पाता और संक्रमण बढ़ता जाता है। यह खतरा खासतौर पर बुजुर्गों में ज्यादा पाया गया है, क्योंकि वे अक्सर दर्द की दवाएं, ब्लड प्रेशर की दवाएं, नींद की गोलियां और एंटीबायोटिक्स एक साथ लेते हैं। इससे बैक्टीरिया तेजी से रजिस्टेंस विकसित कर लेते हैं और इलाज बेअसर हो जाता है। इस स्टडी में कुल नौ आम दवाओं का असर परखा गया, जिनमें पैरासिटामोल, आइबूप्रोफेन, गठिया और डायबिटीज की दवाएं, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने वाली गोलियां और नींद की दवाएं शामिल थीं।
नतीजे चौंकाने वाले रहे, क्योंकि इनमें से कई दवाओं ने बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक दवाओं से बचने में मदद की। इसका मतलब यह है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या सिर्फ एंटीबायोटिक्स के गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल की वजह से नहीं