तिरुवनंतपुरम। विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों के बीच केरल इकाई के भाजपा उपाध्यक्ष ने नया दावा करके विवाद पैदा कर दिया है। बी.गोपालकृष्णन ने दावा किया कि बीते साल के लोकसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए अन्य राज्यों से मतदाताओं को त्रिशूर में स्थानांतरित किया था। गोपालकृष्णन ने भविष्य के चुनावों के लिए भी इसी नीति को अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा, जिन निर्वाचन क्षेत्रों में हम जीतना चाहते हैं, वहां हम जम्मू-कश्मीर से भी लोगों को लेकर आएंगे। हम उन्हें एक साल के लिए बसाएंगे और यह सुनिश्चित करने वाले हैं, कि वे मतदान प्रक्रिया में भाग लें। इसमें कोई संदेह नहीं है, हम भविष्य में भी ऐसा जरूर करने वाले है। पत्रकारों ने पूछा की बाहर से आने वाले कई लोगों के मकान मालिकों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है? इसका जवाब देकर गोपालकृष्णन ने कहा कि यह गलतफहमी केवल इक्का-दुक्का मामलों में सामने आई है। यह गंभीर मुद्दा नहीं है।
इस दौरान भाजपा उपाध्यक्ष ने दावा किया कि त्रिशूर में किसी भी प्रकार का फर्जी मतदान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, फर्जी मतदान का मतलब है, किसी मृत व्यक्ति के नाम पर मतदान करवाना या फिर एक व्यक्ति द्वारा दो बार मतदान करना। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है। उन्होंने विपक्षी पार्टियों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर तंज कसते हुए कहा कि राज्य में यूडीएफ और एलडीएफ ने भाजपा को हराने के लिए कई क्षेत्रों में सांठगांठ की है। अगर उस व्यवहार में किसी को नैतिकता की चिंता नहीं है, तब हमारे इस दृष्टिकोण में भी हमें नैतिकता की कोई दुविधा नजर नहीं आती है।
गोपालकृष्णन के बयान के बाद जारी विवाद को स्पष्ट कर भाजपा के राज्य सचिव एम टी रमेश ने कहा कि कानून के तहत अगर भारत का कोई भी व्यक्ति किसी स्थान पर 6 महीने से अधिक समय तक रहता है, तब वह वहां की मतदाता सूची में पंजीकरण करा सकता है। उन्होंने कहा, त्रिशूर में केवल त्रिशूर के निवासियों का ही पंजीकरण किया गया है, फर्जी वोट माकपा और कांग्रेस ने डाले हैं।
दोनों नेताओं के बयानों के बाद राज्य में बवाल खड़ा हो गया है। केंद्र में पहले से ही चल रहे वोट चोरी के आरोपों के बीच बयान ने उन आरोपों को नई हवा दे दी है। बता दें त्रिशूर लोकसभा सीट पर 2024 में भाजपा उम्मीदवार सुरेश गोपी जीतकर 74,682 वोटों से जीते थे।
