व्यापार : मूडीज, एसएंडपी और फिच जैसी प्रमुख रेटिंग एजेंसियां ट्रंप टैरिफ को भारत के लिए अल्पकालिक चुनौती मानती हैं। हालांकि, अर्थव्यवस्था का दीर्घकालिक परिदृश्य स्थिर और सकारात्मक बना रहेगा। एजेंसियों का आकलन है कि मजबूत घरेलू खपत, 650 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार और निर्यात विविधीकरण की क्षमता भारत को इन झटकों से बचा लेगी। एजेंसियों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का सर्वाधिक असर एल्युमिनियम, स्टील, टेक्सटाइल्स और वाहन उपकरण क्षेत्रों पर पड़ेगा, जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता अपेक्षाकृत अधिक है। फार्मा उद्योग फिलहाल सुरक्षित है। आईटी क्षेत्र भी प्रत्यक्ष टैरिफ से बाहर है, लेकिन अमेरिकी वीजा पॉलिसी और आउटसोर्सिंग नियमों में सख्ती को विशेषज्ञ गैर-टैरिफ बाधा मान रहे हैं। इससे भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
एजेंसियों का आकलन और आधार
मूडीज : भारत की मध्यम अवधि में विकास दर 6.5-7 फीसदी बनी रहेगी। आधार : मजबूत खपत। जीडीपी का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा। पीएलआई जैसी विनिर्माण प्रोत्साहन योजनाएं। फार्मा-आईटी जैसे उच्च मार्जिन क्षेत्रों पर टैरिफ नहीं।
एसएंडपी : भारत की क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर रहेगी। आधार : 650 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार। वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और बैंकों की सुधरी बैलेंस शीट। निवेश और पूंजी प्रवाह में आ रही लगातार मजबूती।
फिच : टैरिफ से व्यापार घाटा बढ़ेगा। भारत झेलने में सक्षम। आधार : बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते का अच्छा संतुलन। नए निर्यात बाजारों में विविधीकरण। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और इन्फ्रा निवेश का उभार।