रायपुर :
प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा द्वारा आज मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में 28 जिलों के कलेक्टर्स के साथ वीडियो कोफ्रेंसिंग के माध्यम से आदि कर्मयोगी अभियान की तैयारियों के संबंध में बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 28 जिलों के 128 विकासखण्डों एवं 6650 आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में इस अभियान के माध्यम से शत प्रतिशत संतृप्ति के लक्ष्य को प्राप्त किया जाना है इसके लिए अन्य विभागों से भी आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि चिन्हांकित आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में जो भी क्रिटिकल गैप है उसे इस अभियान के अंतर्गत जिला स्तर पर आदि कर्मयोगी, ब्लॉक स्तर पर आदि सहयोगी एवं ग्राम स्तर पर आदिसाथी के माध्यम से पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इस हेतु पूरे प्रदेश से लगभग 1.33 लाख वॉलंटियर तैयार किए जाने का लक्ष्य है, जो कि जमीनी स्तर पर जनजातीय समाज के लोंगों के बीच जाकर अभियान की सफलता को सुनिश्चित करेंगे।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा 6 अगस्त को आदि कर्मयोगी अभियान के संबंध में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए थे। उन्होंने जिला कलेक्टर्स को 16 सितंबर से 02 अक्टूबर 2025 तक सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाए जाने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि इस अभियान हेतु रिस्पॉसिव गवर्नेस प्रोग्राम के तहत राजधानी रायपुर में जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के मुख्य तत्वाधान में संभागवार जिला मास्टर ट्रेनर्स के चार दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग इसका मुख्य आयोजक है, जबकि इसमें बीआरएलएफ (भारत ग्रामीण आजीविका मिशन) द्वारा विशेष सहयोग प्रदान किया जा रहा है। पहले चरण में 11 से 14 अगस्त तक रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग संभाग एवं द्वितीय चरण 18 से 21 अगस्त में बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिला मास्टर ट्रेनर्स को अभियान की सभी सूक्ष्म जानकारियां राज्य मास्टर ट्रेनर्स द्वारा दी जा रही है।
प्रदेश के मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन द्वारा 12 अगस्त को संभागवार जिला मास्टर ट्रेनर्स के प्रथम सत्र का शुभारंभ किया गया था। इसी प्रकार 19 अगस्त को केन्द्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय श्री दुर्गादास उइके द्वारा इसके द्वितीय चरण के प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मंत्री श्री रामविचार नेताम द्वारा भी सत्र को संबोधित किया गया।