व्यापार : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। इस फैसले से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। हालांकि भारत के कई विशेषज्ञों और आर्थिक संस्थानों ने इसे चिंताजनक लेकिन नियंत्रण में बताया है।
पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुणायत ने क्या कहा?
पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने ट्रंप के फैसले को अतार्किक और व्यक्तिगत नाराजगी से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा ‘ट्रंप एक बार फिर बिना वजह सजा देने के रास्ते पर चल पड़े हैं। 6 जुलाई को भारत-अमेरिका के बीच वार्ता लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन खुद ट्रंप ने उसे रोककर अपनी टीम को फिर से बातचीत शुरू करने को कहा।’
इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया, ‘अगर अमेरिका कहता है कि भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना चाहिए, तो क्या वह वैसा ही सस्ता तेल दे सकता है? भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को पहले रखना ही होगा।’ अनिल त्रिगुणायत ने यह भी कहा कि, ‘लगता है कि पश्चिमी देश भारत की स्वतंत्र आर्थिक ताकत से खुश नहीं हैं और उसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिलेगी।’
PHDCCI के CEO डॉ. रणजीत मेहता का विश्लेषण
डॉ. रणजीत मेहता, जो भारत के प्रमुख वाणिज्य मंडल PHDCCI के CEO हैं, उन्होंने कहा कि टैरिफ से नुकसान तो है, लेकिन वो बहुत सीमित है। उन्होंने कहा, ‘हमने एक रिपोर्ट में इसका अध्ययन किया है। भारत का अमेरिका को 2024-25 में कुल निर्यात करीब 88 अरब डॉलर है। इस 25% अतिरिक्त टैरिफ से लगभग 1.87% (यानि 8.11 अरब डॉलर) का असर पड़ेगा।’