बारिश में सिस्टम धराशायी, पहले सर्पदंश का नहीं मिला इलाज, तिरपाल तान अंतिम संस्कार

बारिश में सिस्टम धराशायी, पहले सर्पदंश का नहीं मिला इलाज, तिरपाल तान अंतिम संस्कार

गुना: एक इंसान अगर असामयिक काल के गाल में समा जाये तो उसके पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है. उस पर भी अगर अंतिम संस्कार की जद्दोजहद हो तो इससे शर्म की क्या बात होगी. कुछ ऐसी ही तस्वीर मध्य प्रदेश से सामने आई है. जब सर्पदंश से मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए छत तक ना मिली. भारी बारिश में परिजन को तिरपाल के नीचे बुजुर्ग की अंत्येष्टि करना पड़ी.

दिल को झकझोर देने वाली यह तस्वीरें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र गुना की हैं. जहां सतनपुर गांव के रहने वाले बुजुर्ग हजरत सिंह अहिरवार बारिश के मौसम में सर्पदंश का शिकार हो गए. समय पर सही इलाज ना मिल सका तो उनकी मौत हो गई. परिवार अभी इस गम में डूबा था कि उनका अपना दुनिया छोड़ गया था. लेकिन जब अंतिम संस्कार का समय आया तो एक बार फिर सिस्टम की नाकामी ने आइना दिखा दिया.

तिरपाल लगाने को मजबूर परिजन, पेट्रोल-डीजल से जलाई चीता
बारिश में भीगते जैसे-तैसे परिजन और ग्रामीण बुजुर्ग का शव लेकर सतनपुर गांव के मुक्तिधाम पर पहुंचे. लेकिन यहां मुक्ति धाम में बना शेड टूटा हुआ था, परिजन ने अंतिम शैया बनाकर चिता को आग लगाई. लेकिन बारिश की वजह से वह काम भी ठीक से ना हो पाया. लाखों खर्च कर पंचायतों में बनाये गए इस बिना शेड के शमशान में आखिरकार परिजन ने तिरपाल लगाकर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया. शेड ना होने से बारिश की वजह से चीता को जलाने के लिए भी ग्रामीणों को पेट्रोल डीजल का उपयोग करना पड़ा.

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