छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक खेती की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हो सकती है। राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष अजय सिंह ने कृषि विभाग और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को ऐसा करने का सुझाव दिया है।
दरअसल योजना आयोग में गुरुवार को प्राकृतिक खेती की उपयोगिता और संभावना पर एक कार्यशाला हुई। इसमें आंध्र प्रदेश की रायतु साधिकारा संस्था के अध्यक्ष टी. विजय कुमार ने बताया, छत्तीसगढ़ में यह पद्धति किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है।
उनका कहना था, प्राकृतिक खेती की इस पद्धति से धान की उत्पादकता में 9 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। वहीं लागत में लगभग 20 प्रतिशत की कमी भी आएगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी।
राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना से गोबर खरीद कर वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।