जनजातीय समाज प्रकृति पूजक समाज है। प्रकृति के सबसे निकटतम और श्रेष्ठ जीवन पद्धति का परिचायक, जनजातीय समाज है। उनकी जीवन पद्धति, दर्शन, सभ्यता और विरासत में प्रकृति का महत्व समाहित है। पर्यावरण की वैश्विक चुनौती का समाधान, जनजातीय समाज की जीवन सभ्यता में पारंपरिक रूप से परिलक्षित है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने रविवार को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल के नॉलेज रिसोर्स सेंटर स्थित सभागार में “जनजातीय विषय पर शोध एवं पाठ्यक्रम निर्माण हेतु” आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला के समापन के अवसर पर कही। श्री परमार ने कहा कि सभी को जनजातीय समाज के दर्शन, इतिहास, विरासत संस्कृति, जीवन पद्धति और सभ्यता को जानने के लिए उनके मध्य जाने की आवश्यकता है। जनजातीय समाज में स्वाभिमान का दर्शन मिलता है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं व्यक्तिगत रूप से जनजातीय समाज के जीवन पद्धति और दर्शन से प्रभावित हैं। जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए जीवन पद्धति और दर्शन पर अध्ययन और शोध करने की आवश्यकता है। श्री परमार ने कहा कि जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में सिकलसेल रोग के नियंत्रण और उन्मूलन के लिए आयुष विभाग अंतर्गत व्यापक कार्ययोजना के साथ कार्य कर रहे हैं।