रायपुरः छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार ने चुनाव परिणामों के बाद कैबिनेट बैठक की। इस बैठक कई फैसलों पर मुहर लगाए गए। विष्णु देव कैबिनेट ने शराब नीति को लेकर भी एक अहम फैसला लिया। इसके तहत आबकारी विभाग में प्रभावी एफ एल 10 ए और एफएल 10 बी लायसेंस व्यवस्था को समाप्त कर दिया। इसके साथ ही सरकार ने खुद शराब खरीदेगी। इसकी जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन को दी गई है। सीएम साय का यह फैसला शराब व्यवसाय पर गहरी पकड़ और दखल रखने वालों को चौंका गया है। इसके साथ सरकार अब सीधे शराब के निर्माता कंपनी से शराब खरीदेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह फैसला अब आबकारी नीति में बड़े बदलाव की तरह देखा जा रहा है। प्रतिष्ठित और ग्राहकों के बीच प्रभावी दखल रखने वाली बड़ी शराब कंपनियों से शराब की थोक खरीदी कर सरकार को बेचने की व्यवस्था को चलाने के लिए एफएल 10 ए लायसेंस की व्यवस्था बनाई गई। जबकि एफएल 10 बी लायसेंस राज्य के डिस्टलरी और सरकार के बीच सक्रिय थे। यह लायसेंस विदेशी मदिरा के स्टोरेज और होल सेल के उपयोग में प्रभावी थे। ईडी की शराब घोटाले की जांच में एफएल 10 लायसेंस भी घोटालों के हिस्से के रूप में बताए गए थे। इसके लिए सरकार अब सीधे शराब के निर्माता कंपनी से शराब खरीदेगी। अब यह खरीदी छत्तीसगढ़ बेवरेज कार्पोरेशन के जरिए होगी।