जामा तलाशी, फौत, मजरूब और मुजामत सहित अन्य शब्दों को हिन्दी में क्या कहा जाता है। जबकि पुलिसकर्मियों तक को अधिकांश की हिन्दी शब्दावली तक नहीं मालूम है। किसी की मौत होने पर उसे फौत, तालातोड़ कर चोरी करने पर नकबजनी, आमददरफ्त यानी गुमशुदा और गायब होना है। इसके बाद भी एफआईआर लिखते समय इसका उपयोग किया जा रहा है।
सामान्य बोलचाल के दौरान यह प्रचलन में नहीं है। फिर भी अरसे से पुलिस महकमे के द्वारा 69 से ज्यादा उर्दू, फारसी और अन्य भाषाओं के जटिल शब्दों का का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन जटिल शब्दावली को आम नागरिक भी नहीं समझ पाते। इसके बाद भी पुलिसकर्मियों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। लेकिन जल्दी ही इनकी पुलिस महकमे से विदाई होगी।