पटना: बिहार में राजनीतिक उठापटक के बीच आरजेडी से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाता तोड़ना। बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाना। ये सारे घटनाक्रम तेजस्वी यादव के नेतृत्व की एक परीक्षा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में अपनी योग्यता साबित कर चुके तेजस्वी यादव चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़े थे। अपने बीमार पिता को लेकर परेशान रहे तेजस्वी ने हमेशा सब्र बनाए रखा। सियासी जानकार मानते हैं कि तेजस्वी यादव को बिहार की राजनीति में लालू यादव की जगह लेते हुए देखा जा सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में तेजस्वी ने अपनी राजनीतिक निपुणता दिखाई। उन्हें आरजेडी को विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय दिया जाता है। तेजस्वी ने जेडीयू के इस बार नाता तोड़ने के बाद भी सियासी परिपक्वता दिखाई। तेजस्वी ने अपने विधायकों के उस दबाव को टाल दिया। जिसमें बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का दावा पेश करने की सलाह दी गई।
