अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के समय ही बिहार से एक बड़ी जवाबी राजनीतिक पहल शुरू होती दिख रही है। 21 से 24 जनवरी तक समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम (पुराना नाम पिटौंझिया) में पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की 101वीं जयंती मनाने के साथ ही कुछ बड़े आयोजनों के जरिए जाति जनगणना के नतीजों और पिछड़ा आरक्षण के बदले स्वरूप पर राज्यव्यापी चर्चा कराने की योजना है। पिछड़ा गोलबंदी की जो बड़ी कोशिश बीच में पांच राज्य विधानसभाओं के चुनाव के दौरान छूट सी गई थी, उसी टूटे तार को अब फिर से जोड़ा जा रहा है।
बिहार में आरक्षण
नीतीश सरकार ने पिछली गांधी जयंती (2 अक्टूबर, 2023) को जाति जनगणना के नतीजों की घोषणा की थी, जिसमें पिछड़ों और अति पिछड़ों के साथ ही दलितों का प्रतिशत भी अनुमान से ज्यादा पाया गया था। उसी के आधार पर नवंबर, 2023 में बिहार मंत्रिमंडल ने जाति आधारित आरक्षण को 65 फीसदी, और EWS आरक्षण को मिलाकर 75 फीसदी करने का फैसला लिया था।