सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को पाकिस्तान की जासूसी करने वाले भारतीय को 10 लाख रुपए एक्स ग्रेशिया (मुआवजा) देने का आदेश दिया। महमूद अंसारी नाम के इस शख्स का दावा था कि उसे सीक्रेट मिशन पर पाकिस्तान भेजा गया था। लेकिन वहां पकड़े जाने के बाद उसे 14 साल तक जेल में रखा गया। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस रवींद्र भट ने की।
कोर्ट ने फैसला दिया कि अनुग्रह राशि के तौर पर 10 लाख रुपए, 3 हफ्ते के भीतर याचिकाकर्ता को दिए जाएं। हालांकि इससे ये न समझा जाए कि ये पैसा उनके दायित्व या अधिकार से जुड़ा है।
पहले जानिए क्या था पूरा मामला
राजस्थान के रहने वाले महमूद अंसारी 1966 में डाक विभाग में काम करते थे। भारत सरकार के स्पेशल ब्यूरो ऑफ इंटेलिजेंस ने उन्हें 1972 में देश के लिए सेवाएं देने कहा। और उन्हें सीक्रेट ऑपरेशन के लिए पाकिस्तान में भेजा गया। अंसारी भाग्यशाली रहे और सौंपे गए काम को दो बार पूरा कर लिया। लेकिन तीसरी बार पाकिस्तानी रेंजरों ने उन्हें पकड़ लिया।
23 दिसंबर 1976 को अंसारी को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हो गए। अंसारी का कोर्ट मार्शल किया गया। उन पर ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट,1923 (पाकिस्तान का कानून) की धारा 3 के तहत मुकदमा चला। और 14 साल की जेल हुई।