जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी ने श्रीनगर में रैली करके साफ किया कि वह कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा- अनुच्छेद 370 को बहाल नहीं किया जा सकता है। 370 बहाली के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है। मैं अन्य दलों को 370 के नाम पर लोगों का शोषण करने की इजाजत नहीं दूंगा, न ही मैं लोगों को 370 के नाम पर गुमराह करूंगा। यह वापस नहीं आ सकता है।
उन्होंने लोकल पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा- “नेताओं द्वारा किए गए राजनीतिक शोषण ने कश्मीर में एक लाख लोगों की जान ली है। पांच लाख बच्चों को अनाथ किया है। मैं झूठ और शोषण पर वोट नहीं मांगूंगा। मैं वही बोलूंगा जो हासिल किया जा सकता है, भले ही इससे मुझे चुनाव में नुकसान हो।”
अनुच्छेद 370 कितना महत्वपूर्ण है?
आर्टिकल 370 के तहत जम्मू-कश्मीर के पास अपना संविधान, एक अलग झंडा और कानून बनाने की स्वतंत्रता थी। विदेशी मामले, रक्षा और कम्युनिकेशन जैसे मामले केंद्र सरकार के पास थे। इसके लागू रहते जम्मू और कश्मीर की राज्य सरकार स्थायी निवास, संपत्ति के स्वामित्व और मौलिक अधिकारों से जुड़े अपने स्वयं के नियम बनाती थी और राज्य के बाहर के भारतीयों को संपत्ति खरीदने या वहां बसने से रोकती थी।