गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस से इस्तीफे के एक दिन बाद कांग्रेस नेता आनंद शर्मा उनसे मिलने पहुंचे। दिल्ली में आजाद के घर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। इधर, पंजाब के आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी बगावती तेवर दिखाए हैं। शनिवार को तिवारी ने कहा, ‘हमें किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। मैंने 42 साल इस पार्टी को दिए हैं। जिन लोगों ने पत्र लिखे हैं, उन्होंने मुझसे ज्यादा समय पार्टी को दिया है। इस संस्था में हम किराएदार नहीं है, हिस्सेदार हैं। आप धक्के मारकर निकालने की कोशिश करोगे तो देखा जाएगा।’
तिवारी बोले- हमारी चिट्ठी के बाद कांग्रेस सभी विधानसभा चुनाव हारी
मनीष तिवारी ने कहा, ‘मैं गुलाम नबी आजाद पर कमेंट नहीं करना चाहता। उनके पत्र के गुण-दोष में नहीं जाना चाहता। वे समझाने की सबसे अच्छी स्थिति में होंगे। हम 23 लोगों ने 2 साल पहले सोनिया गांधी को लिखा था कि पार्टी की स्थिति चिंताजनक है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उस पत्र के बाद कांग्रेस सभी विधानसभा चुनाव हार गई।